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मोरी में हुई जांच, दून में ऑपरेशन… मोतियाबिंद से लगभग अंधे हो गए बुजुर्गों को मिली नई रोशनी

उत्तराखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र से एक अच्छी ख़बर है हालांकि पहले ही यह स्पष्ट कर दें कि इसमें मंत्रियों या अधिकारियों का कोई दखल नहीं है. यह डॉक्टरों की पहल, जिसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र के डॉक्टर शामिल हैं, की ख़बर से जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के मरीज़ों को सीधा फ़ायदा मिला है.

बीते शनिवार को उत्तरकाशी के दूरस्थ क्षेत्र मोरी में उत्तराखंड लोक विरासत ट्रस्ट के बैनर तले लगाए गए एक निशुल्क मेडिकल कैंप लगाया गया. इसमें देहरादून के कई सीनियर डॉक्टर्स पहुंचे थे.

इनमें दून अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर आशुतोष सयाना बतौर ऑर्थो सर्जन मौजूद थे. उनके साथ  कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर केबी जोशी, सर्जन डॉक्टर एसडी सकलानी, स्किन स्पेशलिस्य डॉक्टर अनिल आर्य, महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अंजलि आर्य और डॉक्टर तृप्ति बहुगुणा, पैथॉलॉजिस्ट डॉक्टर सुषमा जोशी, फ़िज़िशियन डॉक्टर केपी जोशी और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुशील ओझा मौजूद रहे.

मिली नई रोशनी

बताया गया कि इस शिविर में 750 लोगों की जांच की गई और उन्हें दवाएं दी गईं. लेकिन कुछ मरीज़ों के लिए यह शुरुआत भर थी.

इस कैंप में शामिल दून अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुशील ओझा ने सहारा उत्तराखंड को बताया कि कैंप में कुल 22 मरीज़ों की आंखों की जांच की गई थी. इनमें से सभी मरीज़ों को दो-दो, तीन-तीन के बैच में हर बुधवार और शनिवार को अस्पताल में बुलाया गया है.

सोमवार को दून अस्पताल में 75 वर्षीय अकम सिंह और 72 साल के कुंजी राम का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया. दोनों की ही आंखों की रोशनी लगभग चली गई थी जो ऑपरेशन के बााद वापस आ गई. उन्हें दो-तीन हफ़़्ते बाद एक बार फिर चेकअप के लिए आना होगा.

मोरी में विशेषज्ञ डॉक्टरों का संभवतः यह पहला कैंप था जिससे कई लोगों की ज़िंदगी रोशन हो गई है. डॉक्टर ओझा बताते हैं कि दूरस्थ इलाक़ों में ऐसे कैंप लगाने का सिलसिला जारी रहेगा.

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