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कभी पप्पी, कभी आशु बनकर दिल जीतने वाले ‘बाबा’ दीपक डोबरियाल को एक और सम्मान

संजय दत्त प्रोडक्शन की मराठी फ़िल्म बाबा के लिए दीपक को अब तक 10 अवॉर्ड मिल चुके हैं

उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में जन्मे एक बच्चे ने आज फिर एक उपलब्धि हासिल की है. दीपक डोबरियाल को मराठी फ़िल्म बाबा के लिए महाराष्ट्र स्टेट अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड मिला है. दीपक डोबरियाल को बाबा के लिए मिला यह दसवां पुरस्कार है जिसमें फ़िल्मफ़ेयर और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान भी शामिल हैं. संजय दत्त प्रोडक्शन को इस फ़िल्म के लिए मिला यह बीसवां सम्मान है.

इससे पहले दीपक डोबरियाल फ़िल्म भोला में अपने नेगेटिव किरदार के लिए चर्चा में आए थे. तनु वेड्स मनु के बाद पप्पी जी के नाम से पहचाने जाने वाले दीपक को भोला देखने के बाद लोग आशु या अश्वथामा कहकर पुकारने लगे थे.

हालांकि बाबा उनके करियर की बेहद महत्वपूर्ण और ख़ास फ़िल्म है.

बाबा

चूंकि बाबा एक मराठी फ़िल्म है और अभी तक किसी भी ओटीटी पर हिंदी-अंग्रेज़ी सबटाइटल्स के साथ रिलीज़़ नहीं हुई है तो बहुत ज़्यादा संभावना है कि आपने यह फ़िल्म नहीं देखी होगी. इसलिए ज़रूरी लगता है कि इस अद्भुत फ़िल्म के बारे में आपको कुछ बता दें.

यह फ़िल्म महाराष्ट्र के एक गांव में रहने वाले मूक-बधिर जोड़े माधव और आनंदी की है. जिन्हें तीन दिन का एक एक बच्चा मिलता है जिसे वह अपने बच्चे की तरह पालते हैं.

वैसे तो शंकर नाम का यह बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होता है लेकिन मूक-बधिर मां-बाप के चलते वह खुद भी बोलना नहीं सीख पाता है. जब बच्चा सात-आठ साल का हो जाता है तो उसे जन्म देने वाली मां सामने आ जाती है जो एक अमीर परिवार की लड़की होती है लेकिन किसी वजह से उसने 3 दिन के बच्चे को त्याग दिया था.

वह अपने बच्चे को वापस मांगती है लेकिन माधव और आनंदी, जिनकी दुनिया ही शंकर के इर्द-गिर्द घूमती है, इससे इनकार कर देते है, अंततः मामला अदालत में पहुंच जाता है.

 

एक्टिंग का एवरेस्ट

IMDB पर इसे 9.2 स्टार मिले हैं और शानदार टिप्पणी की है लल्लनटॉप पर मुबारक ने. उन्होंने कहा है कि “दीपक ने इस फिल्म में अपनी एक्टिंग का एवरेस्ट छू लिया है”. हम उन्हीं के शब्दों को उधार लेते हैं…

“‘ओमकारा’, ‘तनु वेड्स मनु’ जैसी फिल्मों में अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेर चुके दीपक डोबरियाल पहली बार मराठी फिल्म में नज़र आए हैं. बोलने में असमर्थ शख्स का रोल होने के कारण भाषा की समस्या तो नहीं थी. बाकी बचा अभिनय तो वो उन्होंने, दिल, जान, जिगर, प्राण सब झोंक कर किया है. आप उनसे नज़रें नहीं हटा सकते. एक प्रतिभाशाली एक्टर की देहबोली कैसी होनी चाहिए ये उन्हें देखकर सीखा जा सकता है.”

“एक सीन है जिसमें वो शंकर भगवान की एक छोटी सी मूर्ति के आगे खड़े हैं. उनकी नज़रों में तड़प है, शिकायत है, बेचैनी है. उस सीन को देखकर अमिताभ का दीवार वाला वो सीन सहज ही याद आ जाता है, जिसमें वो शंकर भगवान की ही मूर्ति के आगे कहते हैं, “आज खुश तो बहुत होंगे तुम”! दीपक एक शब्द नहीं कहते लेकिन उतना ही या शायद उससे थोड़ा सा ज़्यादा ही इम्पैक्ट पैदा कर पाते हैं. ये उनकी अदाकारी का लिटरली निशब्द कर देने वाला नमूना है.”

सहारा उत्तराखंड की टीम की ओर से दीपक डोबरियाल को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं कि दीपक आप हम उत्तराखंडियों को गर्व से भर जाने के ऐसे और मौके प्रदान करें.

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