उत्तराखंड

मानव तस्करी से पीड़ित लड़कियों के लिये रेस्क्यू रिट्रीट आयोजित किया

ऋषिकेश।  परमार्थ निकेतन में मानव तस्करी से पीड़ित लड़कियों के लिये रेस्क्यू रिट्रीट आयोजित हुआ। इसमें मुम्बई और दिल्ली से आई 50 से अधिक लड़कियों के लिये आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। वक्ताओें ने रेस्क्यू की गयी लड़कियों को नारी की महानता के बारे में जागरूक किया। सोमवार को परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि नारी ही नारायणी है। नारियों को अपनी शक्ति को पहचानने और सही मार्ग पर चलने हेतु प्रेरित करते हुये कहा कि आपने जीवन में जो भी कर्म किये हैं, उसका फल हमें ही भोगना पड़ता है। इसलिये कर्म ऐसे करें, जो हमें दिव्यता की ओर लेकर जाएं। अक्सर युवा भव्यता की ओर आकर्षित होने लगते हैं, परन्तु भव्यता का आकर्षण थोड़ी देर का होता है।

दिव्यता और समर्पण सदैव साथ रहते हैं। भारतीय संस्कृति दिव्यता और समर्पण की संस्कृति है और नारी का शरीर देवालय है। अतः उसे अपवित्र नहीं होने देना है। नारी है तो सृष्टि है। नारी जैसी होगी वैसे ही सृष्टि होगी। आप सब इसलिये पवित्र पथ पर आगे बढ़ते रहें। अंतरराष्ट्रीय संगठन जीवा की महासचिव डा. साध्वी भगवती सरस्वती ने शरीर और मन के माध्यम से ऐसा कोई कार्य न करें, जिससे बाद में पछताना पड़े। क्योंकि शरीर देवालय है तथा भटके हुये मन को साधने का सबसे उत्तम मार्ग है आध्यात्मिक जीवन। रेस्क्यू फाउंडेशन की प्रमुख त्रिवेणी आचार्य ने कहा कि परमार्थ निकेतन में पीड़ित लड़कियों को प्रेम और करुणा के साथ सशक्त बनने का जो संदेश दिया गया, उससे इन लड़कियों का जीवन बदल जाएगा। इस दौरान इन लड़कियों को योग, सिलाई, बैग बनाना, कला और शिल्प, ब्यूटीशियन प्रशिक्षण, कंप्यूटर प्रशिक्षण, मार्शल आर्ट आदि की औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस दौरान सभी ने एकजुटता का संकल्प लिया।

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