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मिग-21 क्रैश में शहीद हुए जम्मू और हिमाचल के लाल, जाते-जाते कइयों को जिंदगी दे गए दोनों जांबाज पायलट

बाड़मेर । बाड़मेर हादसे में दोनों पायलटों की मौत से हर कोई सन्न रह गया। सब कुछ इतनी जल्दी में हुआ कि पायलट एयरक्राफ्ट से निकल ही नहीं सके। कहा जा रहा कि तकनीकी खराबी के कारण मिग 21 एयरक्राफ्ट क्रैश हुआ। जहां ये घटना हुई उसके आधा किलोमीटर के दायरे में आग ही आग फैल गई। करीब 15 फीट में बड़ा गड्ढा हो गया। भारतीय वायुसेना के अनुसार, बाड़मेर में हादसे का शिकार हुआ मिग 21 विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था। गुरुवार रात 9.10 बजे यह हादसा बायतू के भीमड़ा गांव के पास हुआ। इंडियन एयरफोर्स ने एयरक्राफ्ट में मौजूद दोनों पायलटों की मौत पर गहरा दुख जताया है। वहीं दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं। बाड़मेर में एयरक्राफ्ट क्रैश का ये पहला मामला नहीं है। पिछले 11 महीने के दौरान ये दूसरी घटना है।

राजस्थान के बाड़मेर में हुए मिग 21 क्रैश में जान गंवाने वाले दोनों पायलटों की पहचान हो गई है। इनमें विंग कमांडर मोहित राणा और फ्लाइट लेफ्टिनेंट अद्वितीय बल शहीद हो गए। मोहित राणा, हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के रहने वाले थे। उनके पिता राम प्रकाश सेना में कर्नल के पद से रिटायर हुए थे। अभी चंडीगढ़ में रहे हैं। वहीं फ्लाइट लेफ्टिनेंट अद्वितीय बल जम्मू के रहने वाले थे। घटना बाड़मेर गुरुवार को उस समय हुई जब उत्तरलाई एयरबेस से मिग 21 ने उड़ान भरा, इसके कुछ देर बाद ही इसमें आग लग गई। दोनों पायलटों ने सूझबूझ दिखाते हुए प्लेन को आबादी से दूर ले गए, नहीं तो नुकसान ज्यादा हो सकता था।

मिग क्रैश में शहीद हुए जम्मू और हिमाचल के लाल
बताया जा रहा कि एयरक्राफ्ट में हवा में रहने के दौरान ही आग लग गई थी। हादसा इतना भयानक था कि एयरक्राफ्ट में मौजूद दोनों पायलटों को बचने का मौका नहीं मिला। ऐसी संभावना है कि उनके प्रयासों की वजह से एयरक्राफ्ट एक खेत में गिरा। जहां ये घटना हुई वहां करीब 15 फीट का गड्ढा हो गया, उसके आस-पास आधा किलोमीटर के एरिया में आग ही आग नजर आ रहा था।

बाड़मेर हादसे पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दुख जताया है। उन्होंने दुर्घटना के संबंध में वायुसेना प्रमुख वीआर चौधरी से बात की। रक्षामंत्री ने ट्वीट में कहा कि राजस्थान के बाड़मेर में वायु सेना के मिग-21 ट्रेनर विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से दो वायु योद्धाओं के प्राण गंवाने से बेहद दुखी हूं। देश के प्रति उनकी सेवा को कभी भुलाया नहीं जाएगा। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदना उनके परिजनों के साथ हैं। राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने भी घटना पर दुख जताते हुए शोक संतप्‍त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

हिमाचल के मंडी से थे विंग कमांडर मोहित राणा
भारतीय वायुसेना के अनुसार, बाड़मेर में हादसे का शिकार हुआ मिग 21 विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था। मिग क्रैश में जान गंवाने वाले विंग कमांडर मोहित राणा कुछ दिन पहले ही अपने गांव आए थे। हालांकि, अब वो इस दुनिया में नहीं रहे। उनके पिता अभी चंडीगढ़ में रहते हैं। ऐसा कहा जा रहा कि उनका अंतिम संस्कार चंडीगढ़ में हो सकता है।

लाइट लेफ्टिनेंट आदित्य बल ने नगरोट सैनिक स्कूल से की थी पढ़ाई
वहीं फ्लाइट लेफ्टिनेंट अदित्य बल जम्मू से थे। उन्होंने नगरोटा सैनिक स्कूल से पढ़ाई की थी। आदित्य बल की शहादत पर उनके एक सीनियर ने रिएक्ट किया है। उन्होंने लिखा, श्राजस्थान के बाड़मेर के पास दुर्घटनाग्रस्त मिग-21 ट्रेनर विमान के पायलटों में से एक जम्मू के 26 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट अद्वितीय बल थे। सैनिक स्कूल नगरोटा के गौरव श्अद्वितीयश् अपनी आंखों में तारे और सीने पर पंखों के साथ भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे। परिवार को उनकी शहादत की सूचना दे दी गई है। उनकी शांति के लिए प्रार्थना करें।

राजस्थान में पिछले 10 साल के दौरान ऐसे 8 हादसे हुए हैं। हालांकि, ये पहली बार है जब दो पायलट शहीद हुए हैं। इसी तरह की घटना पिछले साल 24 दिसंबर को भी हुई थी, जब भारतीय वायुसेना का मिग-21 फाइटर एयरक्राफ्ट राजस्थान के जैसलमेर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में पायलट विंग कमांडर हर्षित सिन्हा की मौत हो गई थी। अगस्त 2021 में भी बाड़मेर में एक मिग-21 विमान क्रैश हुआ था। यह भी फाइटर जेट प्रशिक्षण उड़ान पर था। टेक ऑफ के बाद अचानक तकनीकी खामी के बाद ये एक झोपड़ी पर गिर गया। इस हादसे में पायलट की जान बच गई थी। क्रैश से पहले ही पायलट इससे इजेक्ट हो गया था।

1964 से इस विमान को ऑपरेट कर रही भारतीय वायुसेना में इसके क्रैश रिकॉर्ड को देखते हुए श्फ्लाइंग कॉफिनश् (उड़ता ताबूत) नाम दिया गया है। 1959 में बना मिग-21 अपने समय में सबसे तेज गति से उड़ान भरने वाले पहले सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों में से एक था। इसकी स्पीड के कारण ही तत्कालीन सोवियत संघ के इस लड़ाकू विमान से अमेरिका भी डरता था। यह इकलौता ऐसा विमान है जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के करीब 60 देशों ने किया है। मिग-21 इस समय भी भारत समेत कई देशों की वायुसेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। मिग-21 एविएशन के इतिहास में अबतक का सबसे अधिक संख्या में बनाया गया सुपरसोनिक फाइटर जेट है। इसके अबतक 11496 यूनिट्स का निर्माण किया जा चुका है।

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