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राहुल के प्रवास के बाद छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी नई पहचान

अरुण पटेल

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद राहुल गांधी के 3 फरवरी को रायपुर प्रवास के बाद उन्होंने जो शुरुआत की है उससे राष्ट्रीय फलक पर छत्तीसगढ़ को निश्चित तौर पर जहां एक और नई पहचान मिलेगी वहीं दूसरी ओर राज्य में कांग्रेस को और अधिक मजबूती मिलने के साथ ही लगता है कुछ समय के लिए कांग्रेस की आपसी खींचतान पर रोक लगेगी। जिस प्रकार से उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपलब्धियों का बखान किया तथा उन्हें महत्व दिया उसको देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बघेल का राजनीतिक कद ना केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि देश में कांग्रेस की राजनीति में काफी बढ़ गया है। बघेल को जिस प्रकार से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी महत्व दे रहे हैं उससे तो ऐसा ही संकेत मिल रहा है। छत्तीसगढ़ अमर जवान ज्योति तथा सेवाग्राम की स्थापना के लिए आधारशिला रखने के साथ ही राहुल गांधी ने राजीव गांधी भूमिहीन कृषक-मजदूर न्याय योजना की पहली किस्त 2000 रुपया हितग्राहियों को प्रदान करने की जो शुरुआत की है वह भूपेश बघेल सरकार का मास्टर स्ट्रोक कहा जाएगा जिसके द्वारा भूमिहीन किसानों को भी राशि प्राप्त होगी।

इससे बघेल सरकार ने किसानों और खेती पर आधारित भूमिहीन लोगों के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता रेखांकित  की है। छत्तीसगढ़ अमर जवान ज्योति पूरे देश में इकलौती ऐसी ज्योति होगी जो कि किसी राज्य में प्रज्वलित होगी। छत्तीसगढ़ अमर जवान ज्योति यहां शहादत देने वाले देशभर के तथा यहां के देश भर में कहीं भी पुलिस, सेना और सशस्त्र बलों में कर्तव्य पथ पर चलते हुए शहादत देने वाले रणबांकुरों के सम्मान में ज्योति निरंतर प्रज्वलित होती रहेगी । राहुल ने भूपेश को सलाह दी कि बस्तर में काफी अलग-अलग चीजें हैं जो मुझे देखने और चखने को मिली तथा छत्तीसगढ़ और देश के लोगों को ही नहीं अपितु दुनिया भर के लोगों को उसे  चखाइये और छत्तीसगढ़ में यह जो जादू है उसे पूरी दुनिया को दिखाइए।
राहुल गांधी के द्वारा राजीव गांधी भूमिहीन कृषक मजदूर न्याय योजना के तहत दी जाने वाली राशि में 1000 रुपए की वृद्धि करने का जो सुझाव दिया गया था उसे भी स्वीकार करने का संकेत बघेल ने तत्काल दे दिया। इस प्रकार अब प्रतिवर्ष 7000 रुपए की राशि इस योजना के तहत दी जाएगी। राहुल ने कांग्रेस और भाजपा की रीति-नीति में जो अंतर है उसे रेखांकित करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा दो प्रकार का देश बनाना चाहती है जिसमें एक गरीबों का और दूसरा चंद पूंजीपतियों का होगा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस आम जनता के लिए संघर्ष कर रही है। भूपेश बघेल सरकार की सराहना करते हुए राहुल ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में बहुत बड़ा कदम उठाया जा रहा है। हमने यह वायदा किया था कि 2500 रुपया प्रति क्विंटल धान उत्पादक किसानों को देंगे और हमने वह करके दिखाया है। हमने 2018 के विधानसभा चुनाव के समय कहा था कि यह मत सोचिए कि यह हमारा पहला कदम है और बात यहीं अटक जाएगी।

चुनावों के समय हमने कहा था कि किसानों के साथ हमारे मजदूर भाई भी काम करते हैं और हमें उनकी मदद भी करना होगी और वह आज कर रहे हैं।यह राज्य के गरीबों के लिए एक बड़ा कदम है और यह आपका धन है जो आपको वापस दे रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दावा किया कि बीते 3 सालों में कांग्रेस की राज्य सरकार ने 91 हजार करोड़ रुपए लोगों की जेब में पहुंचाएं।

कांग्रेस के घर चलो, घर -घर चलो  अभियान से दूरी बनाते दिग्गज
रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गए की तर्ज पर कहा जा सकता है कि पूरे देश की तरह मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस पार्टी  गुटबंदी के दलदल से उबरती  नजर आने के स्थान पर उसमें और गहरे  धंसती नजर आ रही है। मध्यप्रदेश में विधानसभा के पिछले चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। सीटों के लिहाज से सबसे बड़े राजनीतिक दल के तौर पर कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला था। लेकिन अपने अंतर्विरोधों के चलते ही पंद्रह माह में कमलनाथ सरकार गिर गई। इसका कारण गुटबंदी और कुछ नेताओं का अपना अहम भी था और उसके कारण जो असंतोष पैदा हो रहा था उसकी परिणिति  कमलनाथ सरकार के गिर जाने में हुई। इसके बाद भी पार्टी में गुटबाजी थमती दिखाई नहीं दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा शुरू किए गए घर चलो, घर-घर चलो अभियान से पार्टी के बड़े नेताओं की दूरी नेताओं के बढ़े हुए अहम को जाहिर करने वाली है। राज्य में विधानसभा के चुनाव अगले साल के आखिर में होना है और लगता है कि शायद अभी भी इससे पीछा छुड़ाने के स्थान पर नेताओं की अपने निजी महत्वाकांक्षाएं ही हैं। इसमें दो राय नहीं हो सकती है कि गुटबाजी के चलते ही पंद्रह साल सत्ता से बाहर रही कांग्रेस 15 माह में ही अपनी सरकार गवां  बैठी।

यदि यह कहा जाए कि राष्ट्रीय फलक पर राजनीतिक दलों में कांग्रेस अकेली ऐसी पार्टी है, जिसमें हर स्तर पर इस कदर गुटबाजी को देखा जा सकता है। गुटबाजी के कारण ही पूर्व में कयी दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस को छोडक़र अपनी अलग पार्टी बनाई। शरद पवार और ममता बनर्जी का नाम इनमें प्रमुख है। अर्जुन सिंह और माधवराव सिंधिया जैसे बड़े नेता भी कांग्रेस पार्टी छोडऩे के लिए मजबूर हुए थे। हालांकि माधवराव सिंधिया ने अपनी पार्टी मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस बनाई थी और किसी स्थापित राजनीतिक दल में नहीं गए थे तथा बाद में कांग्रेस में लौट आए। अर्जुन सिंह भी कांग्रेस वापस लौटे। उस समय अविभाजित मध्यप्रदेश था। मध्यप्रदेश कांग्रेस में अर्जुन सिंह और माधवराव सिंधिया की गुट की लड़ाई कई सालों तक चली थी। श्यामाचरण शुक्ल और विद्याचरण शुक्ल का भी अपना गुट रहा है। गुटबाजी के कारण ही कांग्रेस नब्बे के दशक से ही लोकसभा सीटों पर अपनी पकड़ कमजोर करती हुई नजर आई थी। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस केवल एक छिंदवाड़ा की सीट जीतने में सफल रही थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया की हार में कांग्रेस की गुटबाजी को भी एक बड़ी वजह माना जाता है। मार्च 2020 में सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद यह माना जा रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वय दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बीच आपसी समन्वय में गुटबाजी दिखाई नहीं देगी। परंतु ऐसा आभास मिलता है कि दोनों के बीच आपसी समन्वय कुछ लडख़ड़ा रहा है। 2018 से पहले कांग्रेस पंद्रह साल प्रदेश में सत्ता से बाहर रही। इसकी वजह केवल क्षत्रपों का अहम रहा।

कमलनाथ एक साथ दो महत्वपूर्ण पदों पर हैं। प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता का पद उनके पास है। कमलनाथ को वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया था। विधायक दल के नेता का पद उन्होंने सरकार गिर जाने के बाद भी नहीं छोड़ा। दिग्विजय  सिंह इस पद पर अपने समर्थक को बैठाना चाहते थे। कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में प्रमुख पदों का बंटवारा करने के पक्ष में दिखाई नहीं दे रहे हैं। कांग्रेस के महत्वपूर्ण पदों पर वे धीरे-धीरे अपने समर्थकों को बैठाते जा रहे हैं। 1 फरवरी को देवास में घर चलो घर घर चलो अभियान की शुरुआत जब कमलनाथ ने की तो उस समय  वही अधिकांश चेहरे नजर आए जो कमलनाथ के निजी समर्थक हैं। आजकल कांग्रेस के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी बड़े नेता नजर नहीं आ रहे हैं। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे अजय सिंह जरूर अपने प्रभाव वाले इलाके में इस अभियान के पहले से ही सक्रिय हैं और दिसंबर से ही उन्होंने घर वापसी अभियान छेड़ दिया था और अनेक लोगों को कांग्रेस में शामिल कराया तथा जो रूठ कर चले गए थे उन्हें भी पार्टी में वापस लाए। लेकिन फिलहाल दिग्विजय सिंह, कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव, विवेक तंखा अभी तक इस अभियान से दूरी बनाए हुए हैं।

सुरेश पचौरी स्वास्थ्य कारणों से फिलहाल किसी भी कार्यक्रम में भाग लेने की स्थिति में नहीं हैं। इस सिलसिले में प्रदेश कांग्रेस महामंत्री मीडिया के के मिश्रा का कहना है कि पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव कोरोना पॉजिटिव है और कांतिलाल भूरिया अपने क्षेत्र झाबुआ में इस अभियान को चला रहे हैं। दिग्विजय सिंह और विवेक तंखा संसद का सत्र होने के कारण उसमें व्यस्त है और पार्टी में अब किसी भी स्तर पर कोई गुटबंदी नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता योगेश यादव कहते हैं कि कार्यक्रम 28 फरवरी तक चलना है। हर नेता अपने- अपने प्रभाव क्षेत्र में कांग्रेस की मजबूती के लिए काम करते दिखाई देंगे। दरअसल प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर पूरी तरह से कमलनाथ का दबदबा है क्योंकि वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ ही राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। कुछ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि घर-घर चलो कार्यक्रम की सूचना जिलों के कई पुराने कांग्रेसियों को दी ही नहीं गई। दिग्विजय सिंह के भाई चाचौड़ा विधायक लक्ष्मण सिंह जरूर अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दिए।

कमलनाथ समर्थक पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा कहते हैं कि पार्टी के दरवाजे उन सभी के लिए खुले हैं, जो दूसरे दल में दल जाने के बाद भी कांग्रेस पार्टी की विचारधारा से जुड़े रहे। वर्मा ने साफतौर पर कहा कि पार्टी ने घर वापसी का कोई अभियान शुरू नहीं किया है। इसके बावजूद भी अजय सिंह ने सज्जन सिंह वर्मा के कथन को कोई अहमियत ना देते हुए घर चलो घर चलो अभियान के तहत अपनी सफलता विंध्याचल में बना रखी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव भी लंबे समय से उपेक्षित चल रहे हैं। वे कई बार सार्वजनिक तौर कमलनाथ के फैसलों पर सवाल भी खड़े कर चुके हैं। खंडवा लोकसभा के उपचुनाव के बाद कमलनाथ ने जिला कांग्रेस कमेटी के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे यादव समर्थकों हटा दिया था। जाहिर है कि निचले स्तर का कार्यकर्ता  अभियान से जुडऩे के लिए अपने- अपने नेता के निर्देश का इंतजार कर रहा है।

कमलनाथ के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा अगला विधानसभा चुनाव
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की पंद्रह साल बाद सत्ता में वापसी हुई थी। इस वापसी में दिग्गज नेताओं की एकजुटता बेहद महत्वपूर्ण रही थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया का चेहरा स्टार प्रचारक के तौर पर सामने था। दिग्विजय सिंह ने मैदानी कार्यकर्ताओं को एकजुट किया। लेकिन सरकार बनने के बाद गुटबाजी फिर हावी हो गई। यह तय माना जा रहा है कि विधानसभा का अगला चुनाव कमलनाथ के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। कमलनाथ की रणनीति भी इसी ओर इशारा कर रही है।   शिवराज सिंह चौहान की सरकार और भाजपा के प्रति सबसे अधिक आक्रामक मुद्रा में केवल दिग्विजय सिंह ही नजर आ रहे हैं। अजय सिंह भी अपनी दावेदारी को मजबूत करने में लगे हुए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान विंध्य क्षेत्र में ही हुआ था। अजय सिंह खुद भी विधानसभा का चुनाव हार गए थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव में हुई सिंधिया की हार से कमलनाथ का आत्म विश्वास स्वाभाविक तौर बढ़ा। उनके समर्थक लोकप्रिय चेहरा होने का दावा भी कर रहे हैं।
और यह भी

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता रहे और अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में जाने के बाद उसके प्रवक्ता बने पंकज चतुर्वेदी कमलनाथ की शैली पर व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि कमलनाथ जी आपके चलो चलो अभियान के चलते हैं आप व आपकी पार्टी सडक़ पर है। कोई घर ठिकाना बचा नहीं। वैसे भी जनता जनार्दन ने आपको घर बिठा रखा है। अब कौन से घर चलो अभियान की बात आप कर रहे हैं। देवास में इस अभियान के आगाज के समय का उल्लेख करते हुए चतुर्वेदी कहते हैं कि वैसे भी आप हेलीकॉप्टर एवं गाड़ी में बैठकर घर चलो अभियान कर रहे हैं जो आपकी इस अभियान के प्रति गंभीरता को प्रदर्शित करता है ।जब कांग्रेस का नेता प्रतिपक्ष और अध्यक्ष ऐसा कर रहा है तो बाक़ी कार्यकर्ता भी आप का ही अनुसरण कर रहे हैं वे इसको अभियान नहीं अभिनय कहते हैं नाथ जी। /इति/

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