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बुल्डोजर का है राज

ये कार्रवाइयां उन लोगों के खिलाफ हुईं, जिनका दोष अभी न्यायालय में साबित नहीं हुआ है। ये सजा न्यायालय ने नहीं सुनाई। जबकि सभ्य व्यवस्थाओं में यह मान्य सिद्धांत है कि दोष और दंड निर्धारण कानून के स्थापित प्रावधानों के तहत ही होने चाहिए। लेकिन ऐसी सभ्य अपेक्षाएं ताक पर रखी जा रही हैँ।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर उनके घर और प्रतिष्ठान बुलडोजर से तोड़े। भाजपा ने इसे हाल के विधानसभा चुनाव में खूब भुनाया। ये दांव सफल रहा। तो अब पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी इस तरीके को अपनाया जा रहा है। पिछले हफ्ते राज्य के सिवनी जिले के कुरई थाने में दुष्कर्म के एक अभियुक्त का अवैध निर्माण बुलडोजर से ढहा दिया गया। इससे पहले श्योपुर जिले में नाबालिग लडक़ी के साथ गैंगरेप के तीन अभियुक्तों के मकान बुलडोजर से जमींदोज कर दिए गए। उन्हीं में से एक अभियुक्त के खेतों की फसल को भी जेसीबी से नष्ट कर दिया गया। गौरतलब है कि ये कार्रवाइयां उन लोगों के खिलाफ हुईं, जिनका दोष अभी न्यायालय में साबित नहीं हुआ है। ये सजा न्यायालय ने नहीं सुनाई। जबकि सभ्य व्यवस्थाओं में यह मान्य सिद्धांत है कि दोष और दंड निर्धारण कानून के स्थापित प्रावधानों के तहत ही होने चाहिए। लेकिन बुल्डोजर के दौर में ऐसी सभ्य अपेक्षाएं ताक पर रखी जा रही हैँ। फिलहाल, चलन यह है कि पुलिस और प्रशासन ही न्यायालय की भूमिका निभाने लगे हैं। और जब सरकारों की यही नीति हो, तो फिर अदालतें भी ऐसे मामलों में आंख मूंद लेना ही ठीक समझती हैँ।

गौरतलब है कि भोपाल होते हुए जब इन कार्रवाइयों की खबर राज्य के बाहर तब पहुंचीं, जब मध्य प्रदेश के एक विधायक ने बुलडोजर चलाने की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ‘बुलडोजर मामा‘ बताते हुए होर्डिंग्स लगवा दीं। भोपाल की हुजूर सीट से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने अपने आवास पर एक होर्डिंग लगवाया, जिसमें लिखा है- ‘बेटी की सुरक्षा में जो बनेगा रोड़ा, मामा का बुलडोजर बनेगा हथौड़ा।‘ जाहिर है मामा ने यूपी के मुख्यमंत्री से सीख ली है। योगी आदित्यनाथ ने ऐसी कार्रवाइयों को को अपनी सरकार की मुख्य उपलब्धि के तौर पर पेश किया। विधानसभा चुनाव के दौरान इन कार्रवाइयों पर गीत बने, जनसभाओं में इसकी जमकर चर्चा हुई। चुनाव नतीजे के आधार पर दावा किया गया कि लोगों ने इस नीति पर मुहर लगा दी है। मुमकिन है कि मतदाताओं के एक बड़े तबके ने सचमुच इसी वजह से भाजपा को वोट दिया हो। लेकिन उसका यह मतलब भी होगा कि भारत के लोग संविधान और कानून की व्यवस्था को तिलांजलि दे रहे हैँ। भारत एक ऐसा देश बनने की तरफ बढ़ रहा है, जिसे कम से कम आधुनिक अर्थ में तो सभ्य नहीं कहा जाएगा।

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