ब्लॉग

स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जागरूकता जरूरी

लक्ष्मीकांता चावला
भारत के चुनाव आयोग ने यह आवश्यक कर दिया है कि चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। साथ ही शीघ्र से शीघ्र प्रत्याशियों के आपराधिक विवरण की जानकारी समाचारपत्रों में प्रकाशित करवाएं। जरूरी है कि आयोग द्वारा निर्धारित समाचारपत्रों तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में समय से पहले हर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी की सारी जानकारी जनता को दी जाए। आठ फरवरी से पहले इस संबंध में पहला इश्तिहार प्रकाशित हो जाना चाहिए था, जो अधिकतर उम्मीदवारों ने नहीं किया।

दरअसल, चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार चुनाव लडऩे वाले हर उम्मीदवार और उसकी पार्टी को तीन बार समाचारपत्रों और टेलीविजन में उम्मीदवार की आपराधिक पृष्ठभूमि, कितने केस बने हैं और दंड संहिता की किस-किस धारा में ये केस दर्ज हैं, उसका प्रकाशित होना बहुत जरूरी है। दूसरा, इश्तिहार नामांकन वापस लेने की तिथि के पांचवें दिन और तीसरा इश्तिहार नौवें दिन से लेकर प्रचार के आखिरी दिन अर्थात् चुनाव से एक दिन पहले अवश्य ही अखबारों में छपना चाहिए। अखबार भी वह होने चाहिए, जिनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव आयोग ने तय किया है। चुनाव आयोग इस बात से चिंतित दिखाई दे रहा है कि देश में लगभग सभी राजनीतिक दल आपराधिक छवि वाले व्यक्तियों को चुनावी रण में उतार रहे हैं और उनमें से बहुत से जीत भी जाते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में आपराधिक छवि के लोगों को टिकट देने की होड़ लगी है। दूसरी ओर, आंकड़े यह भी बता रहे हैं कि देशभर में वर्तमान और पूर्व सांसदों के खिलाफ आपराधिक मुकदमों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

न्यायमित्र एवं वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया और वकील स्नेहा कलिता ने कहा है कि दिसंबर, 2018 में वर्तमान और पूर्व सांसदों, विधायकों के खिलाफ 4,122 मुकदमे लंबित थे, जो 1 िदसंबर, 2021 को बढक़र 4,984 हो गए। कौन नहीं जानता कि तथाकथित वीआईपी व्यक्तियों और माननीयों के विरुद्ध चल रहे केस जल्दी निर्णय की स्थिति में नहीं पहुंचते। उनके पास बाहुबल तो है ही, धन बल के साथ ही वे मामले सर्वोच्च अदालत में पहुंचने में अनेक वर्ष लग जाते हैं।
अब प्रश्न यह है कि मतदाता क्या करे? सभी नागरिक किसी न किसी राजनेता या राजनीतिक दल के प्रभाव में होते ही हैं और उसी अनुसार मतदान करते हैं।यद्यपि चुनाव आयोग ने नोटा का एक बटन तो बना दिया अर्थात् जिसे कोई भी राजनीतिक दल या प्रत्याशी पसंद नहीं वह नोटा का बटन दबा दे, पर नोटा की किस्मत क्या होगी, बटन दबाने वाला भी नहीं जानता। पिछली बार पंजाब में ही हजारों लोगों ने नोटा का उपयोग किया, पर परिणाम तो शून्य था। सच्चाई यह है कि अगर जीतने वाले प्रत्याशी से भी अधिक नोटा के पक्ष में बटन दबा दिए जाएं तो भी वही जीतेगा, जिसके पक्ष में मतदान ज्यादा हुआ है। देश को, संसद को, चुनाव आयोग और बुद्धिजीवियों को इस पर मंथन कर कोई निर्णय लेना होगा कि जिन मतदाताओं को किसी भी कारण प्रत्याशी स्वीकार नहीं, वे क्या करें। नोटा का कोई न कोई तो उपयोग तय करना ही होगा।
अब प्रश्न मतदाताओं का है। सभी राजनीतिक दलों के लोग चुनावी घोषणाओं के साथ बड़े-बड़े उपहार और मुफ्तखोरी की घोषणा करते हैं। जो अति वंचित लोग हैं वे तो नौ नकद न तेरह उधार की नीति पर चलते हुए चार दिन दिवाली मना लेते हैं, पर राज्य का, देश का क्या बनेगा।

अब भी पंजाब सहित जिन पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, कहीं से यह आवाज नहीं आई कि पीने का शुद्ध पानी मिलेगा। मोटी कीमत खर्च कर बोतलबंद पानी नहीं लेना पड़ेगा। हवा शुद्ध हो जाएगी, प्रदूषण से रोगी नहीं होना पड़ेगा। रोटी सस्ती मिलेगी और रोजगार में हर हाथ को काम व काम के पूरे दाम की नीति अपनाई जाएगी। ठेके की नौकरी पर, आउटसोर्सिंग की चक्की में जवानी को नहीं पिसना पड़ेगा और निराश-हताश देश की जवानी विदेशों में रोटी-रोजी की तलाश में नहीं जाएगी, ऐसी सरकारें पंजाब में या देश में ये राजनेता बनाएंगे। यह तो वे घोषणाएं हैं जो सरेआम हो रही हैं। स्कूटरी की, महिलाओं को एक हजार से पांच हजार रुपये मासिक देने की, बिजली मुफ्त की, किसानों के खजाने में रुपये भेजने की, न जाने कितनी घोषणाएं हैं पर यह तो जनता को सोचना है कि हमने मतदान करना है या मुफ्तखोरी के लालच में अथवा रात के अंधेरों में बंटने वाले हलवे के आधार पर वोट देना है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में यही रास्ता बताया है कि दान देने से पहले दान पात्र की योग्यता भी देखनी चाहिए।

जनता को चाहिए कि कुर्सी के लिए, पार्टी की टिकट के लिए दल बदलने वालों को वोट मत दें। वहीं किसी वस्तु या सुविधा के लालच में वोट देना भी अपने देश, राज्य और लोकतंत्र के साथ धोखा है। अगर वही लोग जीत गए जो धनबल या डंडे के बल से वोट खरीद लेते हैं तो फिर देश में लोकतंत्र नहीं, डंडा तंत्र होगा, भ्रष्टाचार तंत्र होगा तथा भूख-बेकारी और नशों का राज्य होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *